कोरबा नगर निगम आयुक्त पर बदले की भावना से प्रताड़ित करने का आरोप, मुख्यमंत्री से निलंबन और FIR की मांग
कोरबा: नगर पालिक निगम कोरबा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय निवासी दीपक धामेचा ने निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय और भवन अधिकारी भूषण उराव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को चार पन्नों का ज्ञापन सौंपकर दोनों अधिकारियों को निलंबित करने तथा उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मामले के मुख्य बिंदु:
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विवाद की शुरुआत: शिकायत के अनुसार, विवाद 30 जुलाई को दीपक धामेचा की दुकान के बाहर कचरा हटाने और जुर्माना वसूलने के दबाव से शुरू हुआ। आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के 6 अगस्त की रात उनकी दुकान सील कर दी गई, जिसे बाद में महापौर के हस्तक्षेप और टैक्स भुगतान के बाद खोला गया।
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लगातार नोटिस और कार्रवाई का आरोप: शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी संपत्तियों (खसरा नंबर 670/1, 109/2, 188/1/घ/4 और 141/5/3) के वैध व डायवर्टेड होने के बावजूद निगम द्वारा लगभग 15 नोटिस जारी किए गए। उनका कहना है कि शहर में हजारों अन्य निर्माणों की अनदेखी कर केवल उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।
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पुलिस प्रताड़ना और झूठी FIR: दीपक का आरोप है कि निगम अधिकारियों की शह पर उनके और उनके भाई के विरुद्ध झूठी FIR दर्ज कराई गई। जमानत मिलने के बाद भी पुलिस द्वारा लगातार घर और दुकान पर दबाव बनाया गया, जिसके चलते उन्हें कुछ समय बाहर रहना पड़ा।
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परिवार के स्वास्थ्य पर असर: लगातार तनाव और कार्रवाई के भय के कारण शिकायतकर्ता की भाभी सरस्वती धामेचा की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें कोरबा के अस्पताल से बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मुख्यमंत्री से शिकायत और निष्पक्ष जांच की मांग:
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से आयुक्त आशुतोष पाण्डेय और भवन अधिकारी भूषण उराव को तत्काल निलंबित कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, केंद्रीय कैबिनेट सचिव, मुख्य सचिव, मानवाधिकार आयोग और स्थानीय प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को भी प्रेषित की गई हैं।
(नोट: ये आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं; मामले में संबंधित निगम अधिकारियों एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।)
