jyotish shastra ज्योतिष शास्त्र समाधान

शनि पीड़ा से पायें मुक्ति आसान सा उपाय एवं टोटके sani dev sadhe sati totke

Jyotish shastra ज्योतिष शास्त्र। शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। जिसकी गोचर में शनि देव कुपित हो समझो उसका सर्वनाश होना निश्चित है। शनि देव की पीड़ा एवं प्रभाव से मानव से लेकर देवता भी अछूता नहीं है।

शनि देव अगर किसी की महादशा में आये और शनि देव विपरीत हो तो राजा को भी रंग बना देता है। अगर शनि देव कीसी की कुंडली में शुभ फल प्रदान करे तो उसे मालामाल भी कर देता है।

शनि देव साढ़े साती

मनुष्य जीवन में शनि देव गोचर में तीन बार आती है अर्थात शनि ग्रह की साढ़ेसाती मानव जीवन में तीन बार आती है। साढ़ेसाती में जब शनि देव शुभ फल प्रदान करे तो उस व्यक्ति को धन दौलत एवं ऊंची पदवी प्राप्त होती है अगर खराब फल प्रदान करे तो नाना प्रकार की दुःख पीड़ा की पहाड़ सा टुट पड़ता है।

सपने में भैंस

अगर सपने में आपको भैंस भैंसा दिखाई दे तो आप समझ जाइए कि आपको शनि ग्रह की पीड़ा सता रही है।

चलिए अब हम शनि देव को प्रसन्न एवं शांति करने का अचूक उपाय एवं टोटके बताते हैं जिससे आप शनि ग्रह की पीड़ा से छुटकारा पा सकते हैं।

सर्वप्रथम आप शनिवार के दिन स्वयं के साथ से काले रंग की धागे को 19 हाथ लम्बी नाप लेने है एवं उस 19 हाथ लम्बी काले धागे को अपने गले (गर्दन) की की मोटाई के अनुरूप गोल आकार तैयार कर अपने गले में पहनने है। ध्यान रहे कि आप जिस शनिवार को यह उपाय कर रहे हो उस दिन शनि देव की व्रत रखने होंगे। व्रत रखकर उस काले धागे को धूप दीप नैवेद्य आदि से शनिदेव की पूजा करनी होगी। तत्पश्चात काले धागे को अपने गले में पहनने हैं।

शनि देव पूजा पाठ कर ताम्बे के कलश में जल लेकर उसमें काले फूल एवं अक्षत के साथ पीपल वृक्ष को जल अर्पण करना है। इसी तरह आप 7 शनिवार तक व्रत रखने होंगे। काले धागे को केवल व्रत के प्रथम दिन ही पहने हैं। इसे हर शनिवार करने की जरूरत नहीं है।और 7 वे शनिवार को अपने गले से उस काले धागे को निकाल कर बहते पानी में बहा देना है।

जब किसी को शनि ग्रह की साढ़ेसाती अथवा शनि की महादशा चल रही हो उस दौरान व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस मंदिरा आदि का त्याग करना चाहिए। मांस मंदिरा तामसिक भोजन करने से शनि देव और कुपित होते हैं।

व्रत के दिन भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। साम को शनि देव की पूजा करने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें। शनि देव को धूप दीप नैवेद्य अक्षत एवं काली फूल से पूजा करें , पूजा के पश्चात शनि चालीसा पाठ करें तत्पश्चात शनि देव की आरती जरुर करें।

आरती न करने पर पूजा सफल नहीं होती, पूजा पाठ में जो भी कमी रहती है वो आरती करने पर पूजा पूर्ण हो जाती है।

शनि चालीसा पाठ एवं आरती 👉 sani chalisa aarti

इस उपाय को पूरी श्रद्धा विश्वास के साथ जरुर करें आपकी कष्ट एवं सारे दुःख दूर होंगे।

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