कोरबा नगर निगम में पद के दुरुपयोग का आरोप
IAS आशुतोष पांडेय पर शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप, 15 नोटिस भेजकर मकान-दुकान तोड़ने की धमकी देने का दावा कथित झूठी FIR और पुलिस प्रताड़ना से पूरा परिवार परेशान – मुख्यमंत्री से लेकर शासन-प्रशासन तक न्याय की गुहार, आखिर IAS अधिकारी पर कार्यवाही कब?
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त IAS आशुतोष पांडेय की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आई है। कोरबा निवासी दीपक धामेचा ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को लिखित शिकायत सौंपकर निगम आयुक्त सहित निगम के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर पद का दुरुपयोग, व्यक्तिगत रंजिश के चलते परेशान करने और नियमों के विपरीत कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दिनांक 30 जुलाई 2026 को नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उनकी दुकान के आसपास सफाई के नाम पर दबाव बनाया गया तथा कथित रूप से ₹1,000 जुर्माना वसूलने का प्रयास किया गया। इसके बाद लगातार घटनाक्रम बढ़ता गया और 5 अगस्त 2026 से उनके परिवार की संपत्तियों पर बने मकान एवं दुकानों को लेकर लगभग 15 नोटिस जारी किए गए।
बिना पूर्व सूचना दुकान सील करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 6 अगस्त 2026 की आधी रात को नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उनकी दुकान को बिना पूर्व सूचना एवं पर्याप्त जानकारी दिए सील कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि दुकान पर पहले से निगम का टैक्स जमा किया जा रहा था और दुकान को खुलवाने के लिए उन्हें कई दिनों तक निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। बाद में महापौर के हस्तक्षेप के पश्चात दुकान की सील खोली गई। इस दौरान उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कथित झूठी FIR और पुलिस के माध्यम से प्रताड़ना का आरोप
दीपक धामेचा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध कथित तौर पर झूठी FIR दर्ज करवाने तथा पुलिस के माध्यम से लगातार परेशान करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण उन्हें कोरबा से बाहर रहने तक की नौबत आ गई।
परिवार की महिला सदस्य की तबीयत बिगड़ने का दावा
शिकायत में एक बेहद गंभीर पहलू यह भी सामने आया है कि लगातार मानसिक तनाव और परिवार को परेशान किए जाने के कारण उनकी भाभी सरस्वती धामेचा की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें पहले कोरबा के अस्पताल में भर्ती कराया गया तथा बाद में अपोलो अस्पताल बिलासपुर में उपचार कराना पड़ा। शिकायतकर्ता ने अस्पताल के दस्तावेज भी शिकायत के साथ संलग्न किए हैं।
रजिस्टर्ड और डायवर्टेड जमीन पर बने भवनों को लेकर सवाल
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके परिवार की चार खसरा नंबरों की जमीन रजिस्टर्ड एवं डायवर्टेड है। इन जमीनों पर बने भवनों के संबंध में आवश्यक दस्तावेज एवं पूर्व में दिए गए जवाब भी नगर निगम को सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद लगातार नोटिस जारी किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि यदि निर्माण में कोई अनियमितता थी तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता दीपक धामेचा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने नगर निगम आयुक्त IAS आशुतोष पांडेय, भवन अधिकारी भूषण उरांव, नीरज कौशिक सहित संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल – IAS अधिकारी पर कार्रवाई कब?
जब एक आम नागरिक मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत पहुंचाकर अपने परिवार को प्रताड़ित किए जाने, दुकान सील करने, कथित झूठी FIR और लगातार नोटिस भेजे जाने जैसे गंभीर आरोप लगा रहा है, तो शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
क्या IAS अधिकारी होने के कारण किसी अधिकारी को जवाबदेही से छूट मिल सकती है? क्या शिकायतकर्ता को न्याय मिलेगा? क्या शासन इस मामले में जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह शिकायत भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगी?
अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन विभाग इस गंभीर शिकायत पर कब संज्ञान लेते हैं और शिकायतकर्ता को न्याय कब मिलता है।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए लिखित आवेदन एवं उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
